बल्कि अन्य पेय पदार्थों और भोजन से मिलने वाला पानी भी शामिल है। यह मात्रा हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य लक्ष्य नहीं है और इसे सीधे उतनी ही मात्रा में सादा पानी पीने की सलाह नहीं समझना चाहिए।
गर्मी, ज्यादा शारीरिक मेहनत और व्यायाम के दौरान पानी की जरूरत बढ़ सकती है। वहीं, कुछ बीमारियों में पानी का सेवन सीमित रखना पड़ता है। इसलिए अपनी दिनचर्या और शरीर की जरूरत के अनुसार पानी पीना बेहतर है।
पेशाब का हल्का पीला रंग आमतौर पर शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा का एक उपयोगी संकेत हो सकता है। हालांकि, इसका रंग खानपान, दवाओं और कुछ बीमारियों से भी प्रभावित हो सकता है। केवल इसी आधार पर शरीर में पानी की कमी या पर्याप्तता का फैसला नहीं करना चाहिए।
क्या एक बार में ज्यादा पानी पीना नुकसानदायक है?
दिनभर में जरूरत के अनुसार पानी पीना बेहतर है। एक ही बार में बहुत ज्यादा पानी पीने के बजाय समय-समय पर पानी पी सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए किसी निश्चित अंतराल पर पानी पीना जरूरी नहीं है।
कम समय में जरूरत से ज्यादा पानी पीने से खून में सोडियम का स्तर खतरनाक रूप से कम हो सकता है। इस स्थिति को हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है। गंभीर मामलों में इससे सिरदर्द, उलझन, उल्टी और दौरे जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
इसलिए शरीर की जरूरत से ज्यादा पानी पीने के लिए खुद पर दबाव न डालें। खासकर लंबे समय तक व्यायाम करने वाले लोगों को पानी और शरीर में नमक की मात्रा के संतुलन पर ध्यान देना चाहिए। जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लेना भी उपयोगी हो सकता है।
क्या सुबह खाली पेट पानी पीना जरूरी है?
सुबह उठकर पानी पीना अच्छी आदत हो सकती है, खासकर अगर प्यास लगी हो या मुंह सूख रहा हो। लेकिन सुबह खाली पेट पानी पीने से ही शरीर स्वस्थ रहता है या ऐसा करना सभी के लिए जरूरी है, इस दावे के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।
आप सुबह, भोजन के साथ या दिन के किसी भी समय पानी पी सकते हैं। सबसे जरूरी है कि पूरे दिन शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त तरल पदार्थ लेते रहें। फल, सब्जियां, सूप और अन्य खाद्य पदार्थ भी शरीर को पानी देते हैं।
बुजुर्गों और बच्चों को पानी पिलाने में रखें ध्यान
बढ़ती उम्र के साथ कुछ लोगों में प्यास का एहसास कम हो सकता है। ऐसे में बुजुर्गों को नियमित अंतराल पर पानी पीने की याद दिलाना उपयोगी है। बच्चों को भी खेलते समय, स्कूल से लौटने के बाद और गर्मी में पर्याप्त पानी देना चाहिए।
हालांकि, हर व्यक्ति को ज्यादा पानी पिलाना सही नहीं है। किडनी, दिल या लिवर की कुछ बीमारियों में शरीर से अतिरिक्त तरल बाहर निकालने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे मरीजों को डॉक्टर पानी और अन्य तरल पदार्थों की मात्रा सीमित रखने की सलाह दे सकते हैं। उन्हें अपनी मर्जी से पानी बढ़ाने या घटाने के बजाय डॉक्टर की सलाह माननी चाहिए।
बहुत ज्यादा प्यास लगे तो डॉक्टर से कब मिलें?
अगर बार-बार बहुत ज्यादा प्यास लगती है, पेशाब सामान्य से अधिक आता है या रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना पड़ता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार ज्यादा प्यास और बार-बार पेशाब आना डायबिटीज जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के संकेत भी हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच करवाना उचित है।
इसके अलावा, बहुत कम पेशाब आना, पेशाब का लगातार गहरा रंग, चक्कर आना या असामान्य कमजोरी महसूस होना शरीर में पानी की कमी के संकेत हो सकते हैं। लक्षण गंभीर हों या बने रहें, तो चिकित्सकीय सहायता लें।
स्वस्थ व्यक्ति के लिए प्यास शरीर का एक महत्वपूर्ण संकेत है, लेकिन गर्मी, व्यायाम, ज्यादा पसीना आने और बुजुर्गों की स्थिति में नियमित रूप से पानी पीने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पानी की मात्रा को लेकर किसी एक नियम का पालन करने के बजाय शरीर की जरूरत, मौसम और स्वास्थ्य की स्थिति को समझना सबसे बेहतर तरीका है।



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