सुबह की शुरुआत एक कप चाय या कॉफी से और फिर दिन में काम के बीच एक-दो कप और—भारत में लाखों लोगों के लिए यह रोज की दिनचर्या का हिस्सा है। इसके अलावा कोल्ड ड्रिंक, चॉकलेट, प्री-वर्कआउट उत्पाद और खासकर युवाओं के बीच लोकप्रिय एनर्जी ड्रिंक भी शरीर में कैफीन पहुंचाने वाले स्रोत हैं।
कैफीन सीमित मात्रा में सतर्कता और ध्यान बढ़ाने में मदद कर सकता है। यही कारण है कि थकान या नींद महसूस होने पर लोग चाय-कॉफी का सहारा लेते हैं। लेकिन जब दिनभर में अलग-अलग स्रोतों से कैफीन की कुल मात्रा बढ़ जाती है, तो इसका असर नींद, बेचैनी, दिल की धड़कन और रक्तचाप पर पड़ सकता है। अमेरिकी FDA के अनुसार, ज्यादातर स्वस्थ वयस्कों के लिए रोजाना करीब 400 मिलीग्राम तक कैफीन ऐसी मात्रा है, जो आम तौर पर नकारात्मक प्रभावों से जुड़ी नहीं होती। हालांकि हर व्यक्ति में कैफीन सहन करने की क्षमता अलग हो सकती है।
इसलिए सवाल केवल यह नहीं है कि आप चाय या कॉफी पीते हैं या नहीं, बल्कि यह भी है कि दिनभर में कुल कितना कैफीन ले रहे हैं, किस समय ले रहे हैं और उसका स्रोत क्या है।
कैफीन शरीर पर कैसे असर करता है?
कैफीन एक उत्तेजक पदार्थ है, जो दिमाग और तंत्रिका तंत्र की सक्रियता बढ़ाता है। इससे कुछ समय के लिए नींद और थकान कम महसूस हो सकती है और सतर्कता बढ़ सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कैफीन नींद की कमी की भरपाई कर देता है।
CDC के अनुसार, कैफीन का असर कई घंटे तक शरीर में बना रह सकता है। इसलिए देर शाम या रात में चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक लेने से सोने में परेशानी हो सकती है।
यही कारण है कि जो लोग दिनभर थकान दूर करने के लिए बार-बार कैफीन लेते हैं, उनके लिए एक समस्या पैदा हो सकती है—नींद खराब होने के बाद अगले दिन फिर थकान महसूस होना और उसे दूर करने के लिए दोबारा कैफीन लेना।
नींद के लिए क्यों बन सकता है समस्या?
कैफीन का सबसे आम असर नींद पर देखा जाता है। अगर इसे दिन के बाद के हिस्से में लिया जाए तो सोने में अधिक समय लग सकता है और नींद की कुल अवधि कम हो सकती है।
कैफीन की मात्रा और व्यक्ति की संवेदनशीलता के आधार पर असर अलग-अलग हो सकता है। कुछ लोगों को दोपहर के बाद ली गई कॉफी से भी नींद में परेशानी होती है, जबकि कुछ लोग देर शाम तक कैफीन लेने के बावजूद जल्दी सो जाते हैं।
लेकिन नियमित रूप से नींद खराब होने पर अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान लगाने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को पहले से नींद की समस्या है, तो शाम के समय कैफीन कम करना उपयोगी हो सकता है।
एनर्जी ड्रिंक पर ज्यादा सावधानी क्यों?
चाय या सामान्य कॉफी की तुलना में एनर्जी ड्रिंक को लेकर खास सावधानी की जरूरत है। इनमें कैफीन के साथ अक्सर अतिरिक्त चीनी और दूसरे उत्तेजक पदार्थ भी मौजूद होते हैं। CDC के अनुसार, कुछ एनर्जी ड्रिंक में कैफीन के अलावा ग्वाराना और टॉरिन जैसे पदार्थ भी पाए जाते हैं। इनका सेवन रक्तचाप और दिल की धड़कन बढ़ा सकता है।
एनर्जी ड्रिंक का ज्यादा सेवन बेचैनी, नींद की समस्या और कुछ मामलों में दिल से जुड़ी गंभीर परेशानियों से भी जुड़ा पाया गया है। खासकर बच्चों और किशोरों के लिए विशेषज्ञ संस्थाएं इनके सेवन से बचने की सलाह देती हैं।
इसके अलावा एनर्जी ड्रिंक के जरिए कैफीन के साथ बड़ी मात्रा में अतिरिक्त चीनी भी शरीर में पहुंच सकती है। इसलिए किसी पेय को केवल इसलिए सुरक्षित नहीं मानना चाहिए क्योंकि उसमें शराब नहीं है या वह बाजार में आसानी से उपलब्ध है।
क्या कैफीन से ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन बढ़ सकती है?
हां, कुछ लोगों में कैफीन थोड़े समय के लिए रक्तचाप बढ़ा सकता है और दिल की धड़कन तेज महसूस हो सकती है। यह असर हर व्यक्ति में समान नहीं होता।
एनर्जी ड्रिंक को लेकर चिंता इसलिए अधिक है क्योंकि इनमें कैफीन के साथ अन्य उत्तेजक पदार्थ भी हो सकते हैं। CDC के अनुसार, इन पेय पदार्थों से रक्तचाप और हृदय गति बढ़ने की संभावना रहती है।
जिन लोगों को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन में अनियमितता या हृदय संबंधी बीमारी है, उन्हें कैफीन की मात्रा को लेकर अपने डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। कैफीन के प्रति व्यक्तिगत संवेदनशीलता, कुछ दवाएं और स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां भी यह तय करती हैं कि किसी व्यक्ति के लिए कितनी मात्रा ज्यादा हो सकती है।
क्या चाय-कॉफी पूरी तरह छोड़ देनी चाहिए?
ज्यादातर स्वस्थ वयस्कों के लिए ऐसा करने की जरूरत नहीं है। समस्या आमतौर पर चाय या कॉफी पीने से ज्यादा कुल कैफीन की मात्रा और सेवन के समय से जुड़ी होती है।
FDA के अनुसार, स्वस्थ वयस्कों के लिए रोजाना करीब 400 mg तक कैफीन आम तौर पर नकारात्मक प्रभावों से जुड़ा नहीं माना जाता। लेकिन यह कोई ऐसी सीमा नहीं है जो हर व्यक्ति पर समान रूप से लागू हो। गर्भावस्था, कुछ स्वास्थ्य समस्याओं, दवाओं या कैफीन के प्रति अधिक संवेदनशीलता की स्थिति में सुरक्षित मात्रा अलग हो सकती है।
इसलिए दिनभर में चाय, कॉफी, एनर्जी ड्रिंक, कोल्ड ड्रिंक और दूसरे कैफीन वाले उत्पादों को मिलाकर कुल सेवन पर ध्यान देना जरूरी है। केवल कपों की संख्या देखकर अंदाजा लगाना भी सही नहीं है, क्योंकि अलग-अलग उत्पादों में कैफीन की मात्रा काफी अलग हो सकती है।
युवाओं में कैफीन को लेकर क्या चिंता है?
कैफीन का सेवन केवल कॉफी और एनर्जी ड्रिंक तक सीमित नहीं है। 2026 में प्रकाशित अमेरिकी CDC के आंकड़ों के अनुसार, 2021-23 के दौरान 2 से 19 वर्ष की उम्र के 62.6 प्रतिशत युवाओं ने किसी दिन कैफीन का सेवन किया था। 12 से 19 वर्ष की उम्र के युवाओं में औसत दैनिक सेवन 30.7 mg था। हालांकि यह अमेरिकी आंकड़ा है और इसे भारत के युवाओं पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि युवाओं के कैफीन सेवन के स्रोतों में सोडा और मीठे बेकरी उत्पाद भी शामिल हैं। यानी कैफीन का हिसाब लगाते समय केवल चाय और कॉफी को गिनना पर्याप्त नहीं है।
युवाओं के मामले में खास तौर पर एनर्जी ड्रिंक पर सावधानी जरूरी है। CDC के अनुसार, अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स बच्चों और किशोरों के लिए एनर्जी ड्रिंक से बचने की सलाह देती है।
कैफीन का सेवन कम करने का आसान तरीका
अगर आपको लगता है कि दिनभर में कैफीन की मात्रा ज्यादा हो रही है, तो इसे अचानक पूरी तरह बंद करने के बजाय धीरे-धीरे कम करना बेहतर हो सकता है। सुबह की चाय या कॉफी को जारी रखते हुए दोपहर और शाम के कैफीन सेवन को कम किया जा सकता है।
एनर्जी ड्रिंक को रोज की थकान दूर करने का साधन बनाने के बजाय पानी, पर्याप्त नींद और संतुलित भोजन पर ध्यान देना ज्यादा बेहतर विकल्प है। मीठी चाय, फ्लेवर्ड कॉफी और एनर्जी ड्रिंक लेते समय अतिरिक्त चीनी की मात्रा भी देखना जरूरी है। CDC भी अधिक चीनी वाले पेय की जगह पानी जैसे बेहतर विकल्प चुनने की सलाह देता है।
निष्कर्ष यही है कि कैफीन को लेकर डरने की जरूरत नहीं, लेकिन इसकी मात्रा और समय को लेकर जागरूक रहना जरूरी है। अगर चाय-कॉफी के बाद बार-बार दिल तेज धड़कने, बेचैनी, कंपकंपी या नींद में लगातार परेशानी जैसे लक्षण महसूस हों, तो कैफीन कम करने के साथ डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।



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